9 + Short Story in Hindi with Moral | Hindi Kahani For Kids

दोस्तों क्या आप भी हिंदी कहानियां पढ़ना पसंद करते हैं और आप अपने बच्चों के साथ story in Hindi with moral शेयर करना चाहते है| ताकि उनको यह कहानियां पढ़ने के साथ साथ अच्छी शिक्षा भी मिल सके| चलिए दोस्तों अब हम ज्यादा समय ना लगाते हुए आपके साथ story in hindi with moral यानी कि Hindi Kahani For Kids शेयर करने जा रहे हैं चलिए अब हम शुरू करते हैं।

1. इमानदार साहसी बालक – Short Story in Hindi with Moral

सुरेश एक बहुत ही प्यारा बालक था। वह कक्षा दूसरी में पढ़ता था | सुरेश के विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने वाला था | सभी विद्यार्थी परेड प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले थे | सुरेश की अध्यापिका ने उसे इस परेड प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए बोला था और वह भी खुशी-खुशी परेड में हिस्सा लेने के लिए तैयार हो गया | उसके खुशी और उल्लास का कोई ठिकाना ही नहीं था | वह प्रतिदिन विद्यार्थियों के साथ परेड के लिए निरंतर अभ्यास में जुट गया | 

स्वतंत्रता दिवस का दिन आ गया और सुरेश स्कूल के लिए तैयार हो गया | हमेशा की तरह वह अपने दादाजी को ढूंढने लगा क्योंकि हर दिन सुरेश के दादाजी ही उसे स्कूल छोड़ा करते थे, बहुत ढूंढने के बाद जब उसे दादाजी नहीं दिखे तो वह अपनी मां के पास गया और उसकी मां ने उसे बताया कि गांव में दादी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब होने की वजह से दादा जी गांव गए हैं, और पिताजी भी उन्हीं के साथ गए हैं| माँ कहने लगी सुरेश तुम जल्दी तैयार होजाओ  मैं तुझे स्कूल छोड़कर गांव चली जाऊंगी | यह सुनते सुरेश बहुत दुखी हो गया और जिद करने लगा कि मैं भी दादी मां को देखने गांव जाऊंगा | उसकी बहुत ज्यादा जिद करने के बाद माँ उसे भी गांव लेकर चली गई| 

गांव से आने के बाद जब सुरेश स्कूल गया तो मुख्याध्यापक ने सभी विद्यार्थियों को अपने ऑफिस बुलाया जिन जिन ने भी परेड में हिस्सा नहीं लिया था, उसमें सुरेश का भी नाम लिया गया परंतु सुरेश का ध्यान नहीं रहा और उसे लगा कि मुख्याध्यापक ने उसे बुलाया ही नहीं | वह बहुत ही ईमानदार था इसलिए वह खुद ही मुख्याध्यापक के ऑफिस चला गया | वह जाकर वह बोलने लगा कि आपने मेरा नाम क्यों नहीं लिया मैं भी उस दिन परेड के लिए नहीं आ पाया था |

 मुख्याध्यापक ने जब सुरेश की इमानदारी देखी तो वह बहुत ही प्रसन्न हुए और उन्होंने उसे बताया कि उसके माता-पिता ने पहले ही फोन करके उन्हें बता दिया था कि सुरेश आज स्कूल नहीं आ पाएगा और उसका कारण भी बता दिया था | 

लेकिन सुरेश की यह इमानदारी देखकर मुख्याध्यापक बहुत खुश हुए और उसे बड़े प्यार से अपने पास बिठाया और बोले कि मुझे तुम्हारी इमानदारी से बहुत खुशी हुई और अगली बार तुम जरूर परेड में ज़रूर हिस्सा लेना | 

तो बच्चो हमे भी सुरेश की तरह हमेशा सच बोलना चाहिए और ईमानदारी का साथ देना चाहिए | 

Moral of The Story in Hindi

हमें किसी भी स्थिति में सच बोलना चाहिए क्योंकि यह हमें एक अत्यंत क्षमता देता है|  आजकल व्यक्ति अक्सर सच बोलने से डरते हैं और यही उनकी सभी परेशानियों का कारण बनता है| 

2. संगति का असर – Hindi Kahani For Kids

सोहन और मोहन दो भाई थे | वह दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे बल्कि एक ही कक्षा में पढ़ते थे | सोहन बहुत ही होशियार और इमानदार बच्चा था और पढ़ाई में बहुत ध्यान लगाता था | वही मोहन पढ़ने में बिल्कुल नालायक था | और लगातार स्कूल से छुटियाँ करना रहता था | उसकी संगति भी खराब थी | 

जब भी वह स्कूल के लिए तैयार होता रास्ते में उसे उसके दोस्त मिल जाते और वह स्कूल छोड़कर कहीं बाहर चले जाते | लगातार यह होता आ रहा था और सोहन अपने भाई मोहन को बहुत समझाता था की परीक्षा नजदीक है और लगातार स्कूल ना जाता रहा तो अवश्य ही फ़ैल हो जएगा | इस पर मोहन अपने भाई सोहन की कोई बात नहीं मानता था और बल्कि उसे अक्सर डांट हुए बोलने लगता था कि तू अपने काम से काम रख, मुझे पता है कि मुझे  क्या करना है | 

हर रोज की तरह एक और दिन मोहन जब स्कूल के लिए तैयार होकर जाने लगा तो रास्ते में उसके दोस्त उससे मिल गए और कहने लगे कि आज रोहित का जन्मदिन है और हम सभी बाहर चलते हैं | इस पर मोहन उन्हें मना करने लगा और कहने लगा कि नहीं वह तो स्कूल जाएगा | लेकिन उसके दोस्त बार-बार उसे बोलने लगे कि हम जन्मदिन में जाएंगे खाना-पीना करेंगे और उसके बाद मूवी देखेंगे | अपने दोस्तों के बार बार बोलने के बाद मोहन मान गया और उस दिन भी वह स्कूल नहीं गया | 

परीक्षा का रिजल्ट आ गया और मोहन सभी विषयों में फेल हो गया और वही सोहन हमेशा की तरह परीक्षा में प्रथम आया | मोहन जब अपनी मार्कशीट लेकर घर आया तो उसके माता-पिता ने मार्कशीट में देखा | मोहन एक भी विषय में पास नहीं हुआ था | इस पर उन्हें बहुत ज्यादा दुख हुआ उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा परंतु वह मन ही मन बहुत ज्यादा दुखी हुए | 

मोहन ने जब अपने माता-पिता को इस तरह दुखी देखा तो उसे भी बहुत दुख हुआ | फिर कुछ समय के बाद जब सोहन अपनी मार्कशीट लेके आया तो उन्होंने सोहन को गले से लगाया और बहुत खुश हुए | यह देख के उसे लगा कि यह खुशी में भी अपने मां-बाप को देना चाहता हूं | उसने अपने मां-बाप को आश्वासन दिया कि अगली बार परीक्षा में वह भी अच्छे अंक लयेगा | 

मोहन पढ़ाई मै जुट गया, पूरे साल की मेहनत की वजह से मोहन ने भी परीक्षा में बहुत अच्छे अंक लाये  और अपने मां-बाप को प्रसन्न किया | 

तो बच्चो आपने देखा कि संगति आप पर कितना प्रभाव डालती है | आप जितनी अच्छी संगति में रहोगे आपका व्यवहार भी वैसा ही हो जाता है | तो हमेशा अपने दोस्त अक्लमंदी से चुने और उन्हीं के साथ रहे जो कि स्वभाव में अच्छे हो और आप को सही शिक्षा दें | 

Moral of The Story in Hindi

आप जैसी भी संगति में रहते हैं आपको वैसा ही गुण आता है | अर्थात हमें हमेशा अच्छी संगति के लोगों के साथ ही रहना चाहिए | 

3. पश्चात्ताप का भाव – Kahani in Hindi

वेंकटेश उड़ीसा के एक छोटे से गांव में पला बड़ा था | पढ़-लिख कर उसकी बहुत ही अच्छी नौकरी लग गयी |  नौकरी करने के लिए वह शहर में ही रहने लग गया | नौकरी में हुए लगातार प्रमोशन और अच्छी सैलरी की वजह से उसका रहन-सहन बहुत ही अच्छा हो गया था | कंपनी के द्वारा दिए गए फ्लैट पर वह अपनी पत्नी व एक पुत्र के साथ बहुत ही ऐशो- आराम की जिंदगी जीने लग गया, हालांकि इसके लिए व्यंकटेश ने काफी मेहनत भी करी थी | 

व्यंकटेश के माता-पिता गांव में रहते थे| एक दिन व्यंकटेश के पिताजी शहर आय, बढ़ती उम्र की वजह से उनके हाथ-पांव ना चाहते हुए भी हिलते डुलते रहते थे | समय का प्रकोप उन पर देखा जा सकता था | व्यंकटेश के ऑफिस और उसकी पत्नी के ऑफिस घूमने के बाद दादाजी अपने पोते के साथ घर चले गए | 

दादा और पोता सारा दिन एक दूसरे से खूब सारी बातें करते रहते दादाजी अपने पोते को बहुत सारी अच्छी-अच्छी कहानियां सुनाते रहते और वह भी बहुत ही ध्यान से उन कहानियों को सुनता | वेंकटेश की पत्नी सरला ने घर पर चीनी मिट्टी के काफी महंगे बर्तन रखे हुए थे और जब भी कोई खास मेहमान आते तो वह इन्हीं चीनी मिट्टी के बर्तनों में उन्हें खाना दिया करती | 

उसने दादाजी के लिए भी उसने चीनी मिट्टी के बर्तनों में खाना निकाला तो लगातार हाथ पाव हिलने डुलने की वजह से दादाजी से इस क्रोकरी सेट का चम्मच नीचे गिर के टूट गया तो | अगले दिन ही सरला मार्केट जाकर लकड़ी के बर्तन लेकर आ गई इसमें प्लेट कौली और चम्मच आदि शामिल थे | तो अगले दिन जब दादा जी को खाना दिया गया तो सरला ने उन्हें लकड़ी के बर्तनों में उन्हें खाना दिया तो यह देखकर दादा जी के दिल में बहुत बुरा महसूस हुआ किंतु उन्होंने किसी से कुछ भी नहीं कहा | 

फिर एक दिन वेंकटेश और सरला का बेटा मदन खेल रहा था उन्होंने देखा कि वह लकड़ी के बर्तनों के साथ कुछ खेल रहा है तो इस पर उन दोनों ने उसे डांटा और कहा कि यह तुम क्या कर रहे हो | उन्होंने कहा तुम यह क्या खेल खेल रहे हो | इसकी जगह तुम कोई और भी खेल खेल सकते हो|  किंतु मदन लगातार उन्हीं लकड़ी के बर्तनों को खेल खेल रहा था तो फिर अपने माता-पिता की पूछने पर मदन ने उन्हें बोला कि मैं लकड़ी के बर्तन बना रहा हूं तो दोनों ने बोला कि इसकी क्या जरूरत है | इस पर मदन बोला कि जब आप बुजुर्ग हो जाओगे तो आप दोनों को भी तो इन्हीं बर्तनों में खाना दूंगा इसलिए आपको इन बर्तनों की जरूरत पड़ेगी | 

यह सुनते ही उनके होश उड़ गए और वह  दादा जी के पैरो पे गिर कर माफी मांगने लग गए | बुजुर्गों का स्वाभ बहुत ही ज्यादा सरल होता है और इस पर  दादाजी ने उन्हें बड़ी ही आसानी से माफी दे दी | 

Moral of The Story in Hindi

जैसी करनी वैसी भरनी होती है और हमें हमेशा अपना स्वभाव अपना व्यवहार बड़ों के लिए अच्छा रखना चाहिए | 

4. बुद्धि का प्रयोग बुद्धि बल – Story in Hindi For Kids

मनोरम नामक वन में एक बहुत ही सुंदर सा तालाब था | तालाब में बहुत सुंदर सुंदर फूल लगे हुए थे | और तालाब के ठीक बीचोबीच मखाने व सिंघाड़े के पौधे भी लगे हुए थे | तालाब में सदैव खूब सारा पानी रहता था क्योंकि तालाब के साथ ही एक छोटी सी नदी बहती थी | 

एक दिन दो  मछुआरे उस तालाब के पास आराम करने के लिए रुके तो उन्होंने देखा कि तालाब में बहुत सारी मछलियां थी |  तो वह आपस में बातचीत करने लगे कि अरे यह तालाब हमने पहले कभी क्यों नहीं देखा और आपस में विचार-विमर्श करते हुए बोले कि हम इस मछलियों को पकड़ लेते और बाजार में जाकर बेच आएंगे | लेकिन उस दिन काफी ज्यादा अंधेरा हो गया था सूर्य अस्त हो चुका था | इसलिए उन दोनों ने सलाह करी थी वह कल सुबह आकर मछलियों को पकड़ कर ले जाएंगे | 

उन मछुआरो की बातें तीन मछली सहेलियों ने सुन ली तो वह एक दूसरे से बोलने लगी कि हम इन मछुआरों के आने से पहले ही यहां से नदी में चले जाते हैं | इन मछलियों के बीच में एक मछली बहुत ही ज्यादा अलसी थी तो इस पर वह कहने लगी कि कोई बात नहीं जब वह मछुआरे आएंगे तो हम कहीं छुप कर बैठ जाएंगे | 

अगली सुबह हो गयी और योजना के हिसाब से दोनों मछुआरे तालाब के पास आ गए | जैसे ही मछुआरों ने तालाब मै  जाल फेका तो उनमें से एक मछली पहले ही नदी में कूद गई और बाकी मछलियों के साथ वह दो सहेली मछलियां भी मछुआरे के जाल में फंस गई | इस पर एक मछली ने मरने का नाटक किया और वह बिल्कुल भी हिली डुली नहीं तो जब मछुआरे ने यह देखा तो उसे मृत समझकर जाल से बाहर फेंक दिया | और वह चतुर मछली चलती हुई नदी में कूद गयी और अपनी जान बचा ली | लेकिन वह आलसी मछली उसी जाल में ही फसी रह गई और मछुआरे उसे बाजार जाकर बेच आये | 

इस तरह उस मछली के प्राण निकल गए और वही उस चतुर मछली ने सही समय पर अपने बुद्धि का इस्तेमाल करके अपने प्राण बचा लिए | 

Moral of The Story in Hindi

हमें सही समय पर बुद्धि का प्रयोग कर लेना चाहिए जिससे कि भविष्य का निर्माण होगा | अन्यथा मृत्यु ही हासिल होगी | 

5. बकरी मेरे 2 गांव खा गई – Story in Hindi with Moral

मिर्जापुर गांव में राजा वीरभद्र रहते थे | एक बार जब राजा वीरभद्र शिकार पर निकले | सारा दिन शिकार करने की वजह से वह काफी ज्यादा थक गए थे, और एक पेड़ के नीचे विश्राम करने लगे | उस जंगल में काफी ज्यादा हिंसक जानवरों की आवाज आ रही थी |  फिर भी राजा सतर्क होकर पेड़ के नीचे ही विश्राम करता गया | वहाँ बहुत ही ठंडी हवा चल रही थी अच्छी हवा और छांव की वजह से राजा को बहुत गहरी नींद आ गई | 

वहीं पास में एक शेर राजा की और आने लगा और उस पर हमला करने की तैयारी करने लगा | वही से एक वीर जाति का शिकारी वहां से जाने लगा और उसने उस शेर को राजा की और जाते देख लिया | यह देखते वो भाग से वह गया और उस शेर को वहां से मार भगाया | यह\आवाज सुनते ही राजा नींद से जाग खड़ा हुआ, और उस वीर शिकारी ने जब बताया कि किस तरीके से उसने राजा की जान बचाई | 

इस पर राजा ने प्रसन्न होकर उसे वायदा किया कि वह उसे 2 गांव भेट मै  देना चाहते हैं | राजा ने पेड़ से दो पत्ते निकाले और उस पर अपना वायदा लिख दिया और राजा ने उसे कहा कि वह जब भी महल में आए तो यह पता अपने सेनापति को दिखा दे | इस तरह वे उसे 2 गांव दे देंगे तो वह वीर व्यक्ति बहुत खुश हुआ और वह अपने घर चला गया | 

उसने वह दो पत्ते टांग कर रख दिए | वीर व्यक्ति के पास तीन बकरियां थी और अब बकरियां वह दो पत्ते चट कर गई | जब व्यक्ति ने यह देखा कि वह दो पत्ते तो बकरियों ने खा लिए तो उसे बहुत ज्यादा दुख हुआ|  उसे समझ में ही नहीं आने लगा कि वह अब क्या करें | 

इस पर उसने एक युक्ति सूझी और वह महल में चला गया | महल मै  पहुंच के वो जोर-जोर से चिल्लाने लग गया बकरियां मेरा 2 गांव खा गई,  बकरियां मेरा 2 गांव खा गई तो जैसे ही राजा तक यह बात पहुंची तो राजा मुस्कुराने लग गया क्योंकि वह सारी बात समझ चुका था | तो वायदा के अनुसार राजा ने वीर व्यक्ति को उसके दो गांव दे दिए | 

जैसे पहले उसके पास एक घर और 3 बकरी के अलावा कुछ भी नहीं था और अब वह दो गांव का मालिक था | 

Moral of The Story in Hindi

तो बच्चो हमे कभी भी हताश नहीं होना चाहिए, अपितु सही समय पर अपनी बुद्धि का प्रयोग करके हम अपने लिए बहुत सारे रास्ते खोल सकते हैं | 

6. बुद्धि का महत्व – Story in Hindi with Moral

किसी राज्य में एक बहुत ही बुद्धिमान राजा था | उसके पास बहुत बड़ा साम्राज्य था | अब बढ़ती उम्र को देख कर वह अपना साम्राज्य अपने बेटो को देना चाहता था | परंतु वह पुरानी पीढ़ी में दोहराए जाने वाले प्रथा को आगे नहीं बढ़ाना चाहता था जिसमे सबसे बड़े बेटे को सारा राज्य दे दिया जाता था | 

अपितु वह अपने तीनों बेटों में से सबसे बुद्धिमान और काबिल बेटे को यह राजगद्दी सोपना चाहता था | तीनो पुत्रों की बुद्धि का परिचय करने के लिए राजा ने एक युक्ति सुझी | उसने अपने तीन बेटों को राज महल में बुलाया और सभी को एक-एक सोने का सिक्का दिया और उन्हें कहा कि इस सोने के सिक्के से वह ऐसी चीज खरीद कर लाए जिससे वह पूरे महल को भर दें | 

तीनों ही पुत्र सोच में पड़ गए कि सिर्फ एक सोने के सिक्के से वह ऐसी कौन सी चीज खरीद सकते हैं जिससे पूरा महल भर जाए | सबसे बड़े बेटे ने सोचा कि पिताजी बुजुर्ग हो गए हैं और उनकी बुद्धि मारी गई है | इसलिये ही वह ऐसी बात बोल रहे रहे हैं एक सोने के सिक्के से क्या ही आ सकता है | यह सोचकर वह  मेह्खाने में गया और सारी दारु पी गया | 

दूसरा पुत्र उससे भी ज्यादा मंदबुद्धि था वह सोचने लगा कि सबसे सस्ता तो कचरा ही हो सकता है | उसने गांव का सारा कचरा इकट्ठा करके महल को कचरे से भर दिया | 

किंतु सबसे छोटा पुत्र बुद्धिमान था | उसने काफी ज्यादा विचार किया और 2 दिन का समय लिया | उसके बाद उसने मोमबत्ती और अगर बत्तियां खरीदी | 

जिससे उसने महल को रोशनी और खुशबू से भर दिया | इस पर राजा बहुत प्रसन्न हुए | उसकी बुद्धिमति को देखकर उसे राज्य भार सौंप दिया | 

Moral of The Story in Hindi

तो बच्चो हमे भी राजा के छोटे पुत्र से यह सीख लेनी चाहिए की हमे सही समय पर अपने बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए | कोई भी निर्णय लेने से पहले समय ले ले लेकिन अंत में हमेशा बुद्धि  से ही काम लें | इस प्रकार सही बुद्धि का इस्तेमाल करके हम कुछ भी हासिल कर सकते हैं | 

7. पेटू राजा – Moral Story in Hindi

किसी राज्य में एक राजा रहा करता था | राजा खाने पीने का बहुत शौकीन था | वह सदैव ही अपने बावर्ची से बहुत ही स्वादिष्ट खाना बनवा कर खाया करता था | वह तरह-तरह के पकवान बड़े ही शौक से खाता था | खाने में उसे बहुत ही ज्यादा आनंद आता था | 

इस तरह लगातार खाते रहने से उस राजा का लगातार वजन बढ़ता गया और वजह बढ़ने से राजा बीमार पड़ने लग गया | डॉक्टर ने राजा को सलाह दी कि वे अपना खाना पीना कम करें और वजन कम कर दें | इस पर राजा को बहुत ज्यादा गुस्सा आया और उसने डॉक्टर का सर कमल कर दिया| 

राजा ने राज्य में यह ऐलान किया कि जो भी राजा का इलाज करेगा उसे बड़े से बड़ा इनाम दिया जायेगा | अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन सभी का भी सिर कमल कर दिया जाएगा | 

राज्य में एक भविष्यवक्ता था | उसने राजा को कहा कि 1 महीने के अंदर अंदर उसकी मौत हो जाएगी इस पर राजा गुस्से में आ गया और उसने उस भविष्यवक्ता को सलाखों में बंद कर दिया | किंतु उसकी बातों का राजा पर बहुत असर हुआ और अब राजा बहुत ही ज्यादा डरा और सेहमा सा रहने लग गया | 

राजा का खाना पीना भी कम हो गया | वह अपनी मौत के बारे में ही दिन रात सोचा करता | इसी तरह 1 महीना बीत गया और राजा अपने आप को जिंदा पाकर बहुत खुश हुआ | उसने उस भविष्यवक्ता को सलाखों से बाहर बुलाया और उसे कहा कि देख तेरी भविष्यवाणी तो गलत हो गई और अब मैं तेरा भी सर कमल कर दूंगा | इस पर भविष्यवक्ता बोला कि नहीं राजा आप मुझे मत मारिए किंतु अपने आपको शीशे में देखिए | आप कितने स्वस्थ और दुबले पतले हो गए हैं | 

इस पर राजा ने अपने आप को शीशे में देखा और अपने इस काया को देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ हुआ | भविष्यवक्ता बोला कि असली डॉक्टर तो मैं ही हूं मैंने जानबूझकर आपके मौत की भविष्यवाणी करी थी ताकि आप चिंतित होकर खाना पीना कम कर दें और आप स्वस्थ हो जाए इस प्रकार राजा खुश हुआ और उसको इनाम दिया | 

Moral of The Story in Hindi

तो बच्चो हम सभी को भविष्यवक्ता से सीख लेनी चाहिए और अपनी बुद्धि का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए | 

8. आपकी जरूरत –  Short Story in Hindi 

एक व्यक्ति था उसके गुरु सन्यासी थे | वह व्यक्ति भी दुनियादारी से ऊब चूका था और वह भी अपने गुरु की तरह सन्यासी बन जाना चाहता था | जब यह बात उसने अपने परिवार से कहीं तो उसके परिवार के सदस्य उसे मना करने लगे और उसे कहने लगे कि वह सभी उसे बहुत ज्यादा प्यार करते हैं और उससे सन्यासी बनने नहीं देंगे | 

व्यक्ति फिर अपने गुरु के पास वापस गया और उससे कहने लगा कि मैं सन्यासी नहीं बन सकता क्योंकि मेरे परिवार के लोग कहते हैं कि वह मेरे बिना नहीं रह सकते क्योंकि वह उससे बहुत ज्यादा प्यार करते हैं | फिर इस पर गुरु जी बोले कि नहीं यह उनका प्यार नहीं है और उसे अपने साथ मठ में ले गए | वहां गुरुजी ने उस व्यक्ति को योग के कुछ अभ्यास सिखाएं जिससे व्यक्ति घंटों तक अपनी सांस रोक कर शव की तरह पड़ा रह सकता है | 

योग शिक्षा पूरी होने के बाद योग गुरु ने उस व्यक्ति को अपने घर पर भेज दिया | घर में उसने योग का अभ्यास किया और वह शव की तरह पढ़ा रहा | इस पर घर के सभी व्यक्ति ने सोचा कि वह मर चुका है और एकदम से घर में रोने की आवाज गूंजने लग गई | जैसे कि वह व्यक्ति योग मुद्रा में था तो इस तरह वह आसपास के सभी व्यक्तियों को महसूस कर सकता था | गांव के बहुत सारे लोग भी वह आ गए | बहुत ज्यादा रोना हो रहा था उन सभी ने सोचा कि वह सच में मृत हो चुका है | 

वह व्यक्ति लेटे-लेटे बहुत खुश हो रहा था और सोच रहा था कि मेरे परिवार वाले मुझे कितना ज्यादा प्यार करते हैं और मेरे जाने के बाद वह कितना ज्यादा रो रहे हैं | इस पर काफी देर होने के बाद उसके गुरु वहां आए और उसने उसके परिवार को बोला कि वह इस मृत व्यक्ति की जान वापस लेकर आ सकते हैं | 

परिवार वाले एकदम से खुश हो गए और उन्हें बोलने लगे कि हां गुरुजी आप इनकी जान वापिस ले आईए और यह काम में कोई देरी ना करें | फिर गुरु जी ने बोला कि हाँ बेशक इसकी जान बचाई जा सकती हैं परंतु परिवार में से किसी एक व्यक्ति को बदले मै अपनी जान देनी पड़ेगी | तो इस पर परिवार का हर व्यक्ति अपनी जान की जरूरत बताते हुए अपनी जिम्मेदारियों बताने लग गया | गुरुजी ने उनकी पत्नी को पूछा तो कहने लगी कि नहीं मैं अपनी जान नहीं दे सकती क्योंकि वह जीना चाहती है और इस पर गुरु जी कहने लगे कि वह अपने पति के बिना कैसे जियेगी तो उसकी पत्नी कहने लगी कि में अपने पति के बिना जी लूंगी | तो फिर इसके बाद यही सवाल उसने उस व्यक्ति के माता-पिता से किया उनका भी जवाब वहीं था और उनके बच्चों से किया तो उनका जवाब भी वहीं था | 

इस पर गुरु जी बोले कि चलो अगर कोई भी अपनी जान नहीं दे सकता है तो मैं फिर भी इसे जीवित कर दूंगा | गुरुजी मृत शव के पास गए और वे उठ खड़ा हुआ | अब व्यक्ति अपने घर पर 1 पल भी नहीं रहना चाहता था और उसने कहा कि गुरु जी मै आपके साथ आना चाहता हूं और सन्यास लेना चाहता हूं |  तो इस तरह सही समय पर उस व्यक्ति ने अपने जरूरत समझी और देखा कि उसके परिवार में सचमुच उससे कौन प्रेम करता है और कौन नहीं और वहां से चल दिया | 

9. बंदर और गिलहरी का याराना – Story in Hindi For Kids

बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में एक बंदर और एक गिलहरी रहते थे | बंदर की बहुत ही लंबी पूंछ थी, इतनी लंबी कि जब वह पेड़ पर लटकता था तो उसकी पूंछ नीचे जमीन तक पहुंच जाया करती थी | एक दिन इसी तरह बंदर पेड़ पर आराम से लटका हुआ था और उसकी पूंछ नीचे जमीन पर लटक रही थी | वहां पर एक गिलहरी आ गयी जिसे ही उसकी नजर उस पूंछ पर पड़ी तो वह जाकर उस पूछ पर झूला झूलने लगी | 

झूला झूल कर उसे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था तो उस बंदर को एकदम से गुदगुदी होने लग गई | जब उसने नीचे देखा तो पाया की एक गिलहरी उसके पूंछ पर झूल रही थी इस पर वह बोला कि अरे ओ गिलहरी तुम मेरी पूछ पर क्यों झूल रही हो मुझे तो गुदगुदी हो रही है | गिलहरी ने एक दम से ऊपर देखा और कहने लगी कि ओ बंदर राजा तो यह आपकी पूछ है मुझे लगा कोई झूला है इसीलिए मैं झूल रही थी | मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा है | 

इस तरह से वह एक दूसरे से बातचीत करने लग गए और गिलहरी भी ऊपर टहनी में जाकर बंदर के पास बैठ गयी | उन दोनों की दोस्ती बहुत ज्यादा पक्की हो गई अब वह हर दिन एक दूसरे के पास वक्त बिताया करते जब दिल करता गिलहरी बंदर की पूंछ में झूला झूलती और दोनों के बीच बहुत पक्की दोस्ती हो गई| 

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