8 Short Moral Stories in Hindi | हिंदी नैतिक कहानियां

दोस्तों क्या आप भी Moral Stories in Hindi पढ़ना पसंद करते हैं| अगर आप भी Moral Stories यानि कि हिंदी नैतिक कहानियां के बारे में सर्च कर रहे हैं तो आप बिल्कुल सही पोस्ट पर आए हैं| क्योंकि आज इस पोस्ट में हम आपके साथ interesting Short Moral Stories in Hindi शेयर करने जा रहे है| जिन्हें पढ़ने के बाद आपको बहुत अच्छा लगेगा| तो चलिए दोस्तों अब हम शुरू करते हैं।

1. जीवन बदल देने वाली गुरु की सीख

गुरु रामस्वरूप अपने शिष्यों के साथ आश्रम के लिए भिक्षा मांगने जाया करते थे | वह इसी तरीके से भिक्षा मांग कर ही अपने आश्रम के सभी बच्चे वह बुजुर्गों का पेट पालते थे | गुरु अपने शिष्यों के साथ भिक्षा मांगने के लिए एक कस्बे से दूसरे कस्बे तक जाया करते थे | इसी तरह एक दिन गुरुजी अपने कुछ शिष्यों के साथ भिक्षा मांगने चल पड़े | रास्ते में उन्हें बहुत सारे खेत दिखे कुछ खेत बहुत ही हरे और फसल से भरे हुए थे और वहीं कुछ खेत बहुत ही बंजर थे | यह देखते वह आगे बढ़ गए |

वहां एक व्यक्ति खेत में कुछ जुताई कर रहा था | वह बहुत ज्यादा दुखी लग रहा था क्योंकि उसका खेत भी बंजर सूखा पड़ा हुआ था | व्यक्ति ने पेड़ के नीचे एक पोटली में अपना सारा सामान रखा हुआ था| और वह लगातार अपने खेत में जुताई कर रहा था | सभी शिष्यों में से एक शिष्य बहुत ही शरारती था और अपनी शरारती स्वभाव के कारण वह उस पोटली को उठा ले आया |

जब गुरुजी के कान तक है बात पहुंची तो उसने शिष्य को बुलाया और समझाया कि अगर वह ऐसा करेगा तो उसे बहुत ज्यादा दुख होगा| क्योंकि वह गरीब किसान इतनी मेहनत कर रहा है और जब उसे अपना सामान नहीं मिलेगा तो वह बहुत परेशान हो जाएगा बल्कि अगर तुम अपने भिक्षा के पैसे और उसकी पोटली उसके स्थान पे रख आओगे तो तुम देखना कि उसकी प्रसन्नता का कोई हिसाब नहीं रहेगा | तुम्हें भी यह देखकर बहुत ज्यादा खुशी होगी |

गुरुजी के समझाने पर वह शिष्य उस पुतली के नीचे भिक्षा में मिले हुए अपने सारे पैसे छोड़ आया | जब खेत में काम खत्म होने के बाद किसान वापस पेड़ के नीचे गया और पोटली खोलने लगा | उसने देखा की पोटली के नीचे कुछ पैसे रखे हो हुए हैं यह देखकर वह अचंभित हो गया और बहुत खुश हुआ | क्योंकि उसके घर में एक बूढ़ी मां थी जिनके लिए पैसे ना होने के कारण वे औषधि नहीं दिला पा रहा था | अब इन पैसों से वह अपनी मां के लिए दवाई ख़रीद लेगा |

वह सोचने लगा कि यह पैसे किसने रखे होंगे किंतु उससे वहां कोई नहीं दिखा | वह लगातार अपने दोनों हाथों से अपने आंसू पूछता और ऊपर वाले को धन्यवाद करता रहा | उसके आंसू रुक ही नहीं रहे थे | गुरुजी और शिष्य पीछे झाड़ी में छुपकर यह सब देख रहे थे तो इस प्रकार गुरु जी ने शिष्य को उसके जीवन का पाठ पढ़ा दिया और उसे हमेशा कुछ अच्छा करने और दूसरे को खुश रखने  की सलाह दी और यह शिक्षा शिष्य जीवन भर नहीं भूलेंगे | 

2. अपनी पहचान कैसे बनाएं

जितेंद्र एक बहुत ही लोकप्रिय लेखक था| वह अपने हाजिर जवाब और हंसमुख व्यवहार के कारण काफी ज्यादा पसंद किया जाता था | उसने वहां जाकर भी पत्रकारिता करी थी जहां दूसरे पत्रकारों के लिए असंभव था | अपने गुणों के कारण देखते ही देखते वह काफी ज्यादा लोक प्रसिद्ध हो गया और लोगों उसे  बहुत ज्यादा पसंद करने लग गए थे |

इसी तरह एक दिन जितेंद्र बहुत बड़ी सभा को संबोधित कर रहा था | इस आयोजन में लोगों की भीड़ उमड़ उमड़ के आ रही थी | सभी लोग जितेंद्र को सुनना चाहते थे, उसे देखना चाहते थे | जैसे ही जितेंद्र ने अपना भाषण पूरा किया, वह सभा से बाहर आ गया | लोगों की बहुत ज्यादा भीड़ थी सभी लोग जितेंद्र से ऑटोग्राफ लेने के लिए उनकी ओर उमड़ पड़े और जितेंद्र भी अच्छे से हंसते हुए इन सभी से बात करते-करते सभी को ऑटोग्राफ देते आगे बढ़ रहा था |

उसी भीड़ में से एक युवा व्यक्ति बाहर आया और जितेंद्र को कहना कहने लगा कि मैंने आपकी सारी किताबें पढ़ी है और मैं भी आपकी तरह ही एक लोकप्रिय पत्रकार बनना चाहता हूं | जैसे आपने अपनी एक अलग पहचान बनाई है कृपया आप मुझे भी बताएं कि मैं कैसे अपनी एक अलग पहचान बना सकता हूं | यह कहते-कहते उसने अपनी पुस्तक जितेंद्र के हाथ में ऑटोग्राफ लेने के लिए दी जितेंद्र उस समय कुछ नहीं बोले उन्होंने पुस्तक में कुछ 4 लाइनें लिखें और अपना ऑटोग्राफ देकर उससे वह पुस्तक वापस दे दी |

उस व्यक्ति ने जब पुस्तक देखी तो जितेंद्र ने उसमें लिखा हुआ था आप अपना समय स्वयं को पहचान दिलाने में लगाएं किसी दूसरे के ऑटोग्राफ से आपकी पहचान नहीं बनने वाली है | जो समय आप दूसरों लोगों के लिए दे रहे हैं वह समय आप अपने स्वयं के लिए दें | नौजवान यह पढ़कर बहुत प्रसन्न हुआ और अब वह समझ गया कि उसे क्या करना है और जितेंद्र भी मुस्कुराते हुए और उस नौजवान को भविष्य के लिए बहुत सारी शुभकामना देते हुए आगे बढ़ गया | 

3. कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता

एक समय की बात है एक गुरु जी अपने कुछ शिष्यों के साथ कहीं दूर जा रहे थे रास्ता काफी लंबा था सभी बहुत थक भी चुके थे और आराम करना चाहते थे | किंतु उनकी मंजिल बहुत दूर थी और अगर वह विश्राम करते तो उन्हें बहुत ज्यादा रात हो जाती | इसलिए सभी धीरे-धीरे अपने रास्ते पर चले जा रहे थे | बीच में एक नाला आया जिस को पार करने के लिए लंबी छलांग लगानी पड़ रही थी | सभी ने अपने कपड़े उठाए और लंबी छलांग लगाकर नाला पार किया |

नाला पार करते गुरुजी का कमंडल नाले में गिर गया | सभी शिष्य बहुत विचलित हो गए और सोचने लगे कि अब कमंडल को कैसे निकाला जाए | उसमें से एक शिष्य बोला कि मैं जाकर सफाई कर्मचारी को बुलाता हूं | वही इस कमंडल को बाहर निकाल सकता है और बाकी शिष्य परेशान बैठ गए | यह सब देख के गुरु जी को बहुत दुख हुआ क्योंकि गुरु जी ने सभी को सवाब लंबन का पाठ पढ़ाया था | उनकी सीख के हिसाब से कोई भी शिष्य काम नहीं कर रहा था | यह देखकर गुरुजी काफी विचलित हुए |

तभी एक शिष्य उठ खड़ा हुआ जिसका नाम मदन था | मदन ने उस  नाले में हाथ डाला और कोशिश करी कि कमंडल को बाहर निकाले | परंतु मदन के हाथ कुछ नहीं लगा फिर मदन ने अपने कपड़े निकाले और वह नाले में उतर गया और धीरे-धीरे से आगे बढ़कर उसने गुरुजी का कमंडल ढूंढ निकाला | इसे देखकर गुरुजी बहुत प्रसन्न हुए क्योंकि मदन ने इस काम को छोटा या बड़ा नहीं समझा और खुद ही कदम उठाया | इस पर गुरु जी ने मदन की बहुत सराहना की और जो शिष्य सफाई कर्मचारी को बुलाने गया था वह भी अब वापस आ गया | उसे अपनी गलती का पछतावा हुआ | 

Moral of the Story

हमें कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि हम दूसरे से कम से कम मदद लें और खुद ही सभी परेशानियों से निकलने का रास्ता बना ले | 

4. कोई छोटा बड़ा नहीं होता

एक छोटे से कस्बे में शंभू नाम का शिल्पकार रहता था | वह पत्थरों को तोड़ तोड़ कर मूर्तियां बनाने का काम करता था | उसका काम बहुत ज्यादा कष्ट दाए था और उसे पैसे बहुत कम मिलते थे | वह सारा दिन पत्थरों को तोड़कर उनकी आकृतियां बनाता रहता और बहुत ज्यादा थक जाता | तो एक दिन बैठे बैठे शिल्पकार सोचने लगा कि क्यों ना वह कुछ ऐसा काम करें जिससे उसे मेहनत कम और पैसा ज्यादा मिले | 

तभी उसने गली में से एक नेता को गुजरते हुए देखा नेता के चारों और लोगों की भीड़ जमा थी | लोग दोनों हाथ जोड़कर नेता को नमस्कार कर रहे थे |  नेता बहुत ही शान से सभा भीड़ में जा रहा था | उसका ऐश आराम देखकर शंभू ने भी सोचा कि क्यों ना वह नेता बन जाए | इस तरह शंभू एक नेता बन गया और एक दिन शंभू अपने लोगों के साथ रैली में निकल पड़ा | उस दिन बहुत ज्यादा तेज धूप थी और तेज गर्मी सहन ना करने की वजह से शंभू को चक्कर आ गए और वहीं पर गिर गया |

जब उसे होश आया तो उसने अपने को एक बिस्तर में पाया | वह सोचने लगा कि यह सूर्य तो नेता से भी ज्यादा शक्तिशाली है |  इसकी गर्मी के सामने तो कोई भी नहीं टिक सकता क्यों ना मैं सूर्यदेव बन जाऊं तो इस तरह कुछ दिनों में शंभू सूर्य बन गया | अब वह बहुत खतरनाक हो गया था और अपनी रोशनी और तीव्र गर्मी से सभी को परेशान करता | वह बहुत खुश था और सोच रहा था कि उसे शक्तिशाली अब कोई भी नहीं है | 

इस तरह एक दिन उसने देखा कि एक किसान खेती कर रहा था | बहुत तेज थी किंतु वह उसे कोई गर्मी का अहसास नहीं था और वह खुशी-खुशी खेती कर रहा था | तो वह सोचने लगा कि इसे गर्मी क्यों नहीं लग रही है| उसने अपनी रोशनी और तेज बढ़ाई और गर्मी और तेज कर दी किंतु किसान पर उसकी गर्मी का कोई असर नहीं हो रहा था | 

तो जब उसने सोचा कि ऐसा क्यों तो उसे मालूम हुआ कि पृथ्वी में बहुत ठंडी-ठंडी शीतल हवा चल रही है जिसकी मदद से किसान को गर्मी का कोई असर नहीं हो रहा | उसने सोचा कि क्यों ना सूरज से बेहतर वह हवा बन जाए | इस तरह कुछ दिनों में वह हवा भी बन गया अब वह सारा दिन यहां से वहां मस्ती से चलता रहता | तो अचानक उसने देखा कि सामने बहुत बड़ा पहाड़ है परंतु वह इस पहाड़ के पास नहीं जा पा रहा तो उसने पाया कि हवा से भी ज्यादा शक्तिशाली तो पहाड़ है, क्यों ना मैं इस से भी ऊंचा एक पहाड़ बन जाऊं | तो कुछ दिनों में वह पहाड़ भी बन गया | 

अब वह  बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली था और बहुत ही घमंडी हो गया था क्योंकि उसने पाया कि अब उससे ज्यादा शक्तिशाली इस पृथ्वी में कोई भी नहीं है | एक दिन एक शिल्पकार पहाड़ तोड़ने लगा उसके औज़ारों की कर्कश ध्वनि उसे बहुत विचलित करने लग गई | उसने जैसे ही देखा कि कोई शिल्पकार पत्थर तोड़कर मूर्ति बना रहा है तो उसने सोचा कि अब वह वापस से मजदूर नहीं बनना चाहता यही सोचते-सोचते शंभू की नींद खुली और उसने आईने में खुद को शिल्पकार ही पाया क्योंकि अब उसे एहसास हुआ कि शिल्पकार कुछ भी कर सकता है | इसी प्रकार बच्चों कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता अगर आप कोई भी काम लगन और मेहनत से करते हैं तो आपको उसमें सफलता जरूर मिलती है| 

5. धन का नशा

रमेश एक छोटा सा बालक था वह एक छोटे से गांव में रहा करता था | उसकी उम्र केवल 5 साल की थी | एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था | खेलते खेलते वह विरोधी पक्ष पर भारी पढ़ने लग गया | काफी देर झगड़ा चलने के बाद उस बड़े लड़के ने रमेश से कहा कि नौकर है नौकर बन कर रह | यह सुनते ही रमेश एकदम सन पड़ गया उसकी आंखें नम हो गई और आंखों से पानी टपकने लग गया और रमेश वहां से चला गया |

यह बात उसके दिल में बहुत गहरी चोट पहुंचाई थी | फिर बहुत साल गुजर गए रमेश अच्छी पढ़ाई करके बहुत अच्छी कंपनी में नौकरी लग गया | और अब वहां पर नौकर नहीं अपितु मालिक था | उसके नीचे बहुत छोटे छोटे कर्मचारी उसके काम करते थे | अब रमेश का लाइफस्टाइल भी काफी बदल गया था|  इसी तरह एक दिन रमेश कंपनी से बाहर लिफ्ट से उतरते हुए जब बाहर आ रहा था तो उसने देखा कि एक बड़ी सी गाड़ी में एक औरत उत्तरी | वह औरत काफी अमीर दिख रही थी और अचानक वे लेडी गार्ड पर चीखने चिल्लाने लग गई ना जाने उसने ऐसी क्या गलती कर दी थी |

इस पर वह लेडी गार्ड अपनी सफाई देने लग गई और वह लगातार उस पर चीखे ही जा रही थी | लेडी गार्ड के साथ उसका एक छोटा सा बच्चा था | जो कि अपनी मां के पीछे डरा हुआ छुपा हुआ था | उसे देखते ही रमेश को वह बचपन का दिन याद आ गया | उसके कान में वह बात गूंजने लग गई “नौकर है नौकर बन के रह ” उसकी आंखें एकदम से झुक गई और नम से भर गई | 

6. भूत गांव मैं साहस की कहानी

रावली के पहाड़ों के बीच एक बहुत ही सुंदर सा गांव बसा हुआ था | गांव के लोग बहुत मेहनती थे और कृषि निर्माण के द्वारा ही अपना पालन पोषण करते थे|  मनोरंजन के तौर पर गांव के लोग ताश, मुर्गियों की लड़ाई और औरतें बुनाई, कढ़ाई जैसे छोटे-छोटे उद्योग का काम किया करती थी | गांव के लोग आपस में बहुत ही प्रेम भाव से रहते थे और इसी तरीके से मेहनत से अपने दिन बिता रहे थे | 

गांव के बाहर एक कच्चा कुआँ  था | पूरे गांव में उस कुएं के बारे में विचित्र कहानी फैली हुई थी कि रात को उस कुएं के पास चुड़ैल आती है और पानी पीकर वहां से चली जाती हैं | इस तरीके से उस भूत का डर पूरे गांव में फैला हुआ था | बच्चे रात को कभी बाहर नहीं जाते थे और शाम होते ही अपने मां-बाप के पास पहुंच जाते | सभी लोग गांव की इस कहानी पर विश्वास करते थे सिवाय एक लोहार के | वे भीड़ में कहता था कि ऐसा कोई भूत नहीं है और वे एक दिन यह साबित करके रहेगा | 

तो एक दिन वह लोहार रात के समय पर उस कुएं के पास गया और साथ में अपनी कुल्हाड़ी भी ले गया | वह बोलता हुआ गया अब मैं भी देखता हूं वह कौन भूत है और आज ही उसे मजा चखा कर आता हूं | परंतु रात से सुबह हो गई और वह लोहार कभी भी लौट कर वापस नहीं आया | परंतु अगले दिन उसका शव वहां लोगों को मिला | इस हादसे के बाद गांव में और भी ज्यादा डर का सैलाब फैल गया | अब सभी लोगों का इस कहानी पर पूरा विश्वास पक्का हो गया | बच्चे , बूढ़े , बुजुर्ग सभी इस कहानी से डरते थे और शाम को कोई भी बाहर नहीं जाता था | 

उसी गांव में एक फौजी रहा करता था वह छुट्टियों में घर वापस आया और वह अपने बेटे मदन को कहने लगा कि जाओ पास के गांव से टोकरी लेकर आओ हमें सुबह-सुबह खेत के लिए निकलना है | तो फौजी का बेटा मदन मना करने लग गया क्योंकि वह भी उस कहानी से डरता था | अब वह फौजी सोचने लगा कि यह तो फौजी का बेटा हो कर कैसे डर सकता है | वह फौजी अपने बेटे मदन को लेकर रात को बाहर टहलने चला गया | धीरे-धीरे चलते हुए वह गांव से बाहर उस कुएं के पास पहुंच गए |

मदन ने एकदम से अपने पिता का हाथ पकड़ लिया | वह भयभीत होने लग गया जैसे जैसे वह आगे बढ़े वहां एकदम से कुएं के अंदर से विचित्र आवाज आने लग गयी | फौजी ने टॉर्च से अपने बेटे मदन को दिखाया कि देखो इस कुएं में कोई नहीं है बल्कि बहुत सारी पक्षियां है जो हमारे आने से सतर्क हो रही थी इसलिए यह सारी आवाज  है | अब मदन को भी थोड़ी हिम्मत आ गई और वह अपने पिता का हाथ छोड़ कर आराम से वहां घूमने लग गया |

अब मदन हर रात कुएं के पास जाता और वहां से वापस आ जाता | इस तरीके से मदद ने अपने दोस्तों को बताया और उन दोस्तों ने अपने माता-पिता को | इस तरीके से गांव में भी यह बात फैल गई कि वहां पर कोई भूत नहीं है और उन्हें डरने की भी कोई जरूरत नहीं है | धीरे-धीरे लोग खुद से उस कुएं के पास जाने लगे और अब सभी के दिल से भूत का डर भी निकल गया | 

Moral of the Story

तो बच्चों हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है कि हमें अपने ऊपर विश्वास रखना चाहिए और यही विश्वास हमें जीवन के सफलता हासिल करने में मदद करेगी | 

7. बहादुर लड़की 

बिहार के पटना जिला के पालीगंज गांव  में एक बहुत ही प्यारी सी कन्या का जन्म हुआ | कन्या अत्यंत सुंदर थी | कन्या का जन्म होने से उसके मां-बाप बहुत ज्यादा खुश थे | परंतु कुछ रिश्तेदार इसकी आलोचना भी कर रहे थे कि देखो लड़की हुई है और मां बाप इतना उत्सव मना रहे हैं | उसके रूप और सौंदर्य के हिसाब से उसका नाम विदुषी रखा गया | 

विदुषी बहुत ही प्यारी बच्ची थी | वह बहुत ही सुरीली आवाज में किलकारियां मारती रहती थी और कभी-कभी कुछ गुनगुनाती भी रहती थी | मां-बाप उसे हमेशा अपने कलेजे से लगा रखते थे | वह आस पड़ोस के परिवार में भी बहुत खुशियां बंटाती रहती थी | इस तरह  से विदुषी धीरे-धीरे बड़ी होने लग गई | उसके मां-बाप ने पास गांव के ही स्कूल में उसे दाखिला दे दिया | विदुषी पढ़ाई- लिखाई में भी बहुत होशियार थी | यही वजह थी जो की उसे कक्षा में सभी बच्चों से अलग  बनाती थी | 

विदुषी जब केवल 8 वर्ष की थी तो दुर्भाग्यवश उसके माता-पिता का दहन हो गया | अब विदुषी मानसिक रूप से टूट गई थी |  फिर भी वे अपनी पढ़ाई आगे करती रही और आगे बढ़ती रही | उसने कॉलेज में भी दाखिला ले लिया और वह कॉलेज में खेलकूद में भी हिस्सा लेती थी | विदुषी को फुटबॉल ,वॉलीबॉल , बैडमिंटन खेलना बहुत पसंद था|  वह अपने खेल की रूचि को आगे भी बढ़ाना चाहती थी | 

इसी तरह एक दिन विदुषी ट्रेन से कॉलेज के लिए जा रही थी और अचानक ही ट्रेन में कुछ डाकू ने हमला कर दिया | जब विदुषी ने इसका विरोध किया तो डाकू ने विदुषी को ट्रेन से बाहर फेंक दिया तो दुर्भाग्यवश विदुषी की एक टांग ट्रेन के चपेट में आ गयी और उसकी टांग काटनी पड़ गई | फिर भी विदुषी ने अपनी किस्मत से डटकर मुकाबला किया और टांग कटने के बाद भी उसने एवरेस्ट की चढ़ाई चढ़ी और ऊपर जाकर अपने देश इंडिया का झंडा लहराया | और सभी को बहुत ही फक्र महसूस करवाया तो इस कहानी से बच्चों हमें यह सीख मिलती है कि कैसी भी मुसीबत हो हमें हमेशा डटकर और अपनी हिम्मत से काम लेना चाहिए तो संसार की कोई भी शक्ति हमें कुछ भी करने से नहीं रोक सकती | 

8. भगवान का वरदान क्यों बना अभिशाप

सोहन व्यवहार का बहुत ही भोला भाला इंसान था | वह जब भी अपने आसपास गरीबी, दुख और पीड़ा देखता था तो उसे बहुत ही ज्यादा दुख पहुंचता और वह सोचता था कि वह कैसा क्या करें जो जो इन सभी लोगों के दुख तकलीफ को मिटा पाए | वह बहुत धार्मिक था और वह सोचने लगा कि जब कोई तपस्या पर बैठते हैं तो भगवान जरूर दर्शन देकर उनकी मनोकामना को पूरा करते हैं | तो यह सोच कर वह भी पहाड़ियों में जाकर साधना करने लग गया | जंगल बहुत ही घना था | धूप बहुत तेज थी फिर भी वह कठिनाई का सामना करते हुए पहाड़ी में साधना करने बैठ गया | 

बहुत दिन बीत गए उसकी कड़ी साधना देखकर भगवान ने दर्शन दिए|  उसे कहा सोहन आंखें खोलो मैं तुम्हारी तपस्या से बहुत प्रसन्न हूं बोलो तुम्हें क्या चाहिए | सोहन बोला प्रभु आपने मुझे दर्शन दे दिए मेरा जीवन सफल हो गया | मुझे इसके अलावा और कुछ भी नहीं चाहिए | प्रभु फिर भी बोले कि सोहन मुझे पता है तुम मुझसे कुछ मांगना चाहते हो बोलो मैं अवश्य ही तुम्हारे सपना पूरा करूंगा | इस पर मोहन बोला हां प्रभु जब भी मैं अपने आसपास पीड़ा और कष्ट देखता हूं तो मुझे बहुत दुख होता है | आप मुझे बताइए कि मैं लोगों की कष्ट और पीड़ा को कैसे दूर करूं| 

 इस पर भगवान बहुत प्रसन्न हुए कि मोहन दूसरों के बारे में कितना सोचता है | भगवान ने उसे एक टहनी दी जिसमें खूब सारे पत्ते लगे हुए थे | यह टहनी देते हुए भगवान बोले कि यह पत्ते हमेशा हरे भरे रहेंगे | यह टहनी कभी नहीं टूटेगी| तू पत्त्ते निचोड़ के किसी भी इंसान के मुंह में एक बूंद भी डाल देगा तो उसके सारे कष्ट , भूखमरी और सारी परेशानी अपने आप ही दूर हो जायेंगी | 

उस टहनी को पाकर सोहन बहुत खुश हुआ और देखते ही भगवान अंतरलीन हो गए | सोहन वहां से चल दिया क्योंकि वह एक मनुष्य था, उसके मन में अलग-अलग भाव जागने लग गए | वह सोचने लग गया कि जब वह इंसानों की तकलीफ दूर करेगा तो उसका बहुत नाम हो जाएगा वह बहुत ही प्रसिद्ध हो जाएगा शायद उसे गांव का सरपंच बना दिया जाए, क्या पता उसे जिला का विधायक भी बना दें | यह सब कुछ सोचते हुए वह वहां से चल रहा था | 

अचानक उसने सोचा वैसे भगवान ने वरदान तो दे दिया और अगर यह कार्य नहीं किया तो उसकी बहुत जग हंसाई होगी | अब वह इस वरदान को पहले आजमाना चाहता था | इससे पहले कि वह गांव में किसी भी इंसान पर इसका प्रयास करता | वह अब ऐसे इंसान को ढूंढने लगा जो तकलीफ में हो | 

वैसे चलते- चलते उसकी नज़र जंगल में एक शेर पर पड़ी, जिसकी हड्डियां बाहर थी | वह दुर्बल था और नीचे पड़ा हुआ था तो उसने सोचा क्यों ना यह इसी पर इस्तेमाल किया जाए | सोहन ने उन पत्तों को निचोड़ कर एक बूंद शेर के मुंह में डाल दी और शेर तुरंत ही जाग  खड़ा हुआ | क्योंकि वह भूख से दुर्बल हुआ हुआ था और जमीन पर गिरा हुआ था | सोहन को देखते ही उसने अपनी भूख मिटाने की सूची और उसने एकदम से सोहन को जकड़ कर अपने मुंह में डाल दिया और क्षण में ही सोहन की जीवन लीला समाप्त हो गई | 

Moral of the Story

लोग महत्वकांक्षी की आड़ में कई बार  ऐसे काम कर देते हैं जिससे उन्ही का नुकसान हो जाता है जैसे सोहन ने कभी नहीं सोचा था कि शेर को जीवन दान देने की वजह से उसका खुद का जीवन ही खत्म हो जाएगा | 

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