पंचतंत्र की कहानियां | Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi

दोस्तों क्या आपको भी कहानियां पढ़नी अच्छी लगती है? क्या आप भी पंचतंत्र की कहानियां (Panchtantra Ki Kahaniya In Hindi) पढ़ना चाहते हैं? आज के इस पोस्ट में हम आपको पंचतंत्र की कुछ खास चुनिंदा कहानियों के बारे में बताने जा रहे हैं| परंतु उस से पहले हम आपको बताना चाहेंगे कि पंचतंत्र क्या है? और पंचतंत्र की कहानियां क्या है तो आइए दोस्तों अब हम शुरू करते हैं।

पंचतंत्र क्या हैं? (Panchatantra Kya Hai)?

पंचतंत्र के नाम से यह प्रतीत होता है कि जैसे हम किसी नीति शास्त्र के बारे में बात कर रहे हैं| अगर देखा जाए तो पंचतंत्र का असली नाम नीतिशास्त्र ही है| पंचतंत्र की संरचना पंडित विष्णु शर्मा ने संस्कृत भाषा में की थी| संस्कृत की नीति कथा में पंचतंत्र का प्रथम स्थान है| इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पंचतंत्र को विश्व में 50 से भी अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है| इन अनुमानों के आधार पर कह सकते हैं कि पंचतंत्र की रचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास की गई थी। 

पंचतंत्र को मुख्य पांच भागों में बांटा गया है| जिसमें मित्रभेद (मित्रों में मनमुटाव व अलगाव), मित्रलाभ अथवा मित्रसंप्राप्ति (मित्र प्राप्ति और उसके लाभ), काकोलुकीयम् (कौवे एवं उल्लुओं की कथा), लब्धप्रणाश (हाथ लगी चीज (लब्ध) का हाथ से निकल जाना), अपरीक्षित कारक (जिसको परखा नहीं गया हो उसे करने से पहले सावधान रहें ; हड़बड़ी में कदम न उठायें)।

1. सच्चे मित्र ( हिरण , कबूतर और चूहा ) – Hindi panchatantra stories

जंगल में एक कबूतर, चूहा और एक हिरण तीनों अच्छे मित्र थे| जंगल में बने हुए तालाब में वह पानी पीते थे, फल खाते थे और वही सरोवर के आसपास घुमा फिरा करते थे| एक समय की बात है कि एक बार उस जंगल में एक शिकारी आ गया| उसने हिरण को पकड़ने के लिए जाल बिछाया| उसने थोड़ा समय लगाकर हिरण को पकड़ने के लिए जाल को छुपा कर रख दिया और उसे वह जाल छुपाने में सफलता भी मिली| 

शिकारी ने जाल में हिरण को फंसा लिया| तभी वहां पर उसका मित्र कबूतर और चूहा आये| वह सब कुछ देख रहे थे, तब कबूतर देखने लगा कि शिकारी यहां से कितनी दूर है और उसे यहाँ आने में कितना समय लगेगा और वही चूहे ने जाल को काटना शुरू कर दिया था| वह कबूतर शिकारी को ढूंढता ढूंढता कुछ दूरी पर निकल गया| उसने शिकारी को देखा और तब कबूतर ने शिकारी पर आक्रमण कर दिया| जब कबूतर ने शिकारी पर आक्रमण किया तब शिकारी को कुछ देर तो समझ नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें। वह कबूतर से परेशान होकर बचने लगा| परंतु कबूतर भी शिकारी को ज्यादा देर तक रोक नहीं पाय उस शिकारी ने जल्दी कबूतर पर काबू पा लिया और वह जाल की ओर आया यहां लगभग चूहे ने जाल को काट दिया था और हिरण लगभग जाल से निकलने वाला था| 

परंतु शिकारी को जाल के पास आता देख कर इतने में कबूतरों के झुंड ने निकाली पर आक्रमण कर दिया वह ताबड़तोड़ शिकारी पर आक्रमण करते रहे आक्रमण से शिकारी घबरा गया थोड़ा समय उसे कबूतरों पर काबू पाने में लगा| इतने में चूहे निडर होकर जाल काट दिया और हिरण जाल से निकल गया| उसके बाद चूहा और हिरण अपने अपने रास्ते भागने लगे| तब हीर ने पीछे मुड़ कर देखा कि उनका तीसरा मित्र कबूतर, शिकारी के पास फस गया है| उस कबूतर ने अपनी जान की परवाह करे बिना हिरण की जान बचाई थी तो हिरण ने उसे बचाने की सोची| 

हिरण धीरे-धीरे लंगड़ा कर चलने लगा, शिकारी को लगा कि हिरण के चोट लग गए है उसने हिरण को दुबारा पकड़ने के लिए उसकी और भागा और कबूतर को उस शिकारी ने छोड़ दिया| जैसे ही हिरण ने देखा कि शिकारी ने कबूतर को छोड़ दिया है, तब हिरण भी तेजी से दौड़ने लगा| इस तरह चूहा भी अपने बिल में घुस गया और कबूतर भी आजाद हो गया| इस तरह तीनों मित्रों ने सूझबूझ से एक दूसरे की रक्षा की| 

2. बन्दर और लकड़ी का खूंटा – पंचतंत्र की कहानी

एक बार की बात है कि एक शहर में किसी मंदिर का निर्माण हो रहा था| उस मंदिर में लकड़ी का काम हो रहा था| वहां पर लकड़ी के बड़े-बड़े लट्ठे पड़े हुए थे| वहां पर काम करने वाले मजदूरों की गिनती भी बहुत ज्यादा थी क्योंकि वहां पर सिर्फ लकड़ी का ही काम उस समय चल रहा था| वह मजदूर सारा दिन वहां पर काम करते रहते थे और दोपहर के वक्त वह हमेशा भोजन करने के लिए पास में शहर में जाया करते थे| 

एक दिन की बात है कि मजदूर वहां पर काम कर रहे थे| तभी भोजन करने का समय हो गया| तब एक मजदूर का लकड़ी का लट्ठे बीच में ही रह गया था| उसने अभी उस लट्ठे को पूरा नहीं काटा था| तो उस मजदूर ने उस लट्ठे के बीच एक कील को लगा दिया था ताकि उसे याद रहे कि आ कर इसी लट्ठे पर उसने काम दोबारा शुरू करना है और फिर वह लोग भोजन करने के लिए वहां पास में मौजूद शहर में चले गए। 

तभी इतनी देर में वहां पर बंदरों का झुंड आ गया| वह बंदर वहां पर मंदिर के अंदर घुस गए और शरारते करने लगे| उनमें एक शरारती बंदर भी था जो अक्सर ही शरारते करता रहता था| तब उन बंदरों के झुंड के राजा ने उन्हें कहा कि वह वहां से बाहर आ जाएं और वहां पर शरारत ना करें| परंतु उनमें से एक बंदर जो काफी ज्यादा शरारती था| आंख बचाकर वहां से दूसरे बंदरों से बचता हुआ वहीं लकड़ी के लट्ठे के पास रह गया और बाकी सारे बंदर मंदिर से बाहर निकलकर पेड़ों पर लटकने लगे। 

फिर वह बंदर जो अंदर लकड़ी के लट्ठे के पास था वह शरारते करने लगा| उसने वहां पर एक आरी को देखा जिसको उसने उठाकर उस आरी को लकड़ियों पर मारने लगा| जैसे ही वह लकड़ियों पर आरी को चलाता तो वहां से आवाज निकलती जिसको सुनकर वह बंदर परेशान हो रहा था| फिर उस बंदे ने उस लकड़ी के लट्ठे को देखा जिसके बीच कील लगी हुई थी| उसने थोड़ी देर कील को देखा फिर उसने सोचा कि मैं इस कील को लट्ठे से बाहर निकाल देता हूँ| बंदर उस कील को निकालने के लिए पूरा जोर लगाने लगा थोड़ा समय जोर लगाने के बाद कील थोड़ा सा हिलने लगा| तो बंदर को अपना बल देख कर खुशी हुई उसने सोचा कि अब मैं इस कील को निकाल कर ही रहूंगा| 

वह कील को और जोर-जोर से खींचने लगा| वह इतना ज्यादा उत्साहित हो गया कि उसे पता ही नहीं चला कब उसकी पूछ उस लकड़ी के लट्ठे के बीच में फस गई है| उसने कील को जोर से हिलाया और कील एकदम से बाहर निकल गई और उसकी पूछ उसी लट्ठे के बीच में फस गई| कील निकलते ही लकड़ी के लट्ठा  आपस में इस तरह से चिपक गया जैसे उसमे स्प्रिंग लगे हो| इतने में उस बंदर ने देखा कि मजदूर वापस आ रहे हैं वहां से भागने लगा तो उसकी पूंछ टूट गई| वह अपनी पूंछ को लेकर वहां से निकला और भागने लगा।

3. दो मित्र हाथी और खरगोश की कहानी

एक जंगल में एक चिंटू खरगोश और नंदू नामक हाथी रहता था| वह दोनों बहुत अच्छे मित्र थे| वह अक्सर ही साथ में घूमा करते थे| उनकी दोस्ती की बहुत ज्यादा चर्चाएं थी| एक दिन की बात है मौसम बहुत अच्छा और सुहावना था, चारों तरफ हरी घास लहरा रही थी, पेड़ों के ऊपर पत्तियां आई हुई थी| खरगोश और हाथी ने खूब सारा खाना खाया और वह आराम कर रहे थे| आराम करते हुए उन दोनों ने सोचा कि आज हम कुछ खेल खेल खेलते हैं तो दोनों ने प्लान बनाया और खेल खेलने के लिए तैयार हो गए| 

इस पर नंदू बोला हम आज कुछ ऐसा खेल खेलेंगे जो पहले किसी ने नहीं खेला होगा जो बिल्कुल नया होगा| इस पर खरगोश भी तैयार हो गया| नंदू बोला वह खेल ऐसा होगा:- पहले मैं बैठ जाऊंगा तुम मेरे ऊपर से मुझे स्पर्श करे बिना दूसरी तरफ कूद जाओगे, फिर उसके बाद तुम बैठ जाओगे मैं तुम्हारे ऊपर से बिना तुम्हें स्पर्श करे कूद जाऊंगा| चिंटू खरगोश डर गया, किंतु उसके दोस्त का मन था इसलिए वह भी खेलने के लिए तैयार हो गया| पहले हाथी जमीन पर बैठ गया और खरगोश दूर से दौड़ा आया और बिना हाथी को स्पर्श करें एक तरफ से दूसरी तरफ कूद गया| 

अब हाथी की बारी थी, चिंटू खरगोश बैठ गया और वह सोचने लगा अगर हाथी उसके ऊपर कूद गया तो मेरा कचुंबर निकल जाएगा, मेरे प्राण चले जाएंगे| परंतु डरा हुआ खरगोश फिर भी बैठा रहा| जैसे ही हाथी दौड़ने लगा आसपास के नारियल के पेड़ हिलने लगे और ऊपर से नारियल टूट कर दोनों के ऊपर गिर गए| हाथी को कुछ समझ नहीं आ रहा था वहां से भाग गया और खरगोश भी अपनी जान बचाकर वहां से भाग गया| खरगोश सोच रहा था कि हाथी से अच्छे तो नारियल है, अगर हठी मेरे ऊपर गिरता तो मई मर जाता| खरगोश ने सोचा मित्र हर किसी को बनाना चाहिए और उसके साथ खेलना भी चाहिए| परंतु ऐसा खेल खेलना चाहिए जिससे नुकसान हो।

4. सियार और ढोल – पंचतंत्र की कहानी

एक समय की बात है कि 2 राजाओं के बीच आपस में बहुत ही बड़ा युद्ध हो रहा था| उनमें से एक राजा जीत गया तो एक राजा हार गया| दोनों राजाओं की सेना अपने-अपने नगर की ओर लौटने लगी| जब सेना लौट रही थी तो अपने साथ ढोल लेकर गए चरण और भांड रात में वीरता की कहानियां सुनाते थे| वह ढोल पीछे ही रह गया| 

कुछ दिनों के बाद ढोल हवा के झोंके से लुढ़कते लुढ़कते सूखे पेड़ के नीचे जाकर गिर गया| उस पेड़ की सूखी टहनिया जब भी उस ढोल के ऊपर घिरती तो धम की आवाज सुनाई देती थी| उस समय एक सियार हमेशा घूमता रहता था| सियार ने उस ढोल की आवाज सुनी और वह डर गया उसने सोचा कि ऐसा कौन सा जानवर है जो इतनी जोर से चिल्ला रहा है| उसने तो यह आवाज पहले कभी नहीं सुनी है| सियार थोड़ा आगे गया तो उसकी नजर उस ढोल पर पड़ गई| वह उस ढोल को देख रहा था और सोच रहा था की इस जानवर के चार पांव है या फिर ये जानवर उड़ता है। 

जब सियार झाड़ी के पीछे छुप कर उसको देख रहा था पेड़ से गिलहरी उसके ऊपर आ कर बैठ गई थी| तब उसमे से धम की आवाज़ आई| तब सियार सोचने लगा कि यह इतना भयानक नहीं है| इस से डरने की कोई जरूरत नहीं है| यह सिर्फ भर का खोल है| फिर सियार धीरे से ढोल की और उसे वहां ना उस जानवर का सर दिखाई दे रहा था फिर अचानक से हवा का झोंका आया उस पर पेड़ की टहनी गिरी तो उसमें से फिर से धमकी आवाज आवाज सुनकर पीछे की ओर और गिर गया था कि ऐसे बोलता हुआ उठा और कहा वह तो खोल के अंदर है यह तो सिर्फ बाहर का खोल है | इसको धमक से ही पता लगता है कि वह जानवर कितना मोटा तगड़ा और चर्बी से भरपूर होगा तब इतनी जोर से डम डम की आवाज निकाल रहा है|  

सियार अपनी मांद के पास गया और बोला मै मोठे और ताज़े शिकार का पता करके आया हूं| दावत के लिए तैयार हो जाओ| इतना सुनने के बाद सियारी ने पूछा कि तुम उसका शिकार करके क्यों नहीं लाए| तब सियार ने सियारी को जवाब दिया कि मै तुम्हरे जैसा मुर्ख नहीं हूँ| वह जानवर उस खोल के अंदर छूप कर बैठा है| जिसके दो दरवाजे हैं एक तरफ से उसका शिकार करता तो दूसरी तरफ से निकल जाता इसलिए हम दोनों मिलकर उसका शिकार करेंगे| फिर सियार और सियारिन चांद निकलने के बाद उस ढोल की और गए दूर से थोड़ी देर तक उस ढोल को देखते रहे| 

तब अचानक से हवा की हवा चली और पेड़ की टहनिया ढोल के ऊपर गिर गई और ढोल से धम धम की आवाज निकलने लगी| तब  सियार ने सियारनी से बोला तुमने कोई आवाज सुनी है| तुम खुद सोचो ये जानवर खुद कितना मोटा और ताजा होगा| उसके बाद दोनों ढोल के पास चले गए ढोल की एक तरफ सियार और दूसरी तरफ सियारी बैठ गए| फिर दोनों ने उस चमड़ी को धीरे-धीरे अपने दांतो से उखाड़ना शुरू कर दिया| जैसे ही चमड़ी फट रही थी तब सियार ने सियारनी से कहा कि सावधान रहना हमें एक साथ ही दोनों तरफ से हाथ डालकर शिकार को पकड़ना है| 

फिर दोनों ने अंदर हाथ डाला अंदर कुछ भी नहीं था और दोनों ने आपस में एक दूसरे का हाथ ही पकड़ लिया था और दोनों ही एक साथ चिल्लाये| यहां तो कोई भी नहीं है फिर दोनों अपना सिर पिटते ही रह गए।

5. शरारती बंदर – Panchtantra ki kahani

एक समय की बात है एक जंगल में एक शरारती बंदर रहा करता था| वह सभी को बहुत परेशान करता था| वह बंदर पेड़ों पर लगे हुए फल फेंक कर आने जाने वाले जानवरों को तंग करता था| एक बार गर्मी का मौसम था और बहुत सारे आम लगे हुए थे| बंदर सभी पेड़ों पर घूम-घूम कर आमों को खा रहा था| उनका रस चूस रहा था और नीचे आने जाने वाले जानवरों के ऊपर फेंक कर उन्हें मारता और उन पर खूब हंसता था| 

एक समय की बात है कि एक बार उस जंगल से हाथी गुजर रहा था| उस समय बंदर भी पेड़ों पर घूम रहा था और आम खा रहा था| बंदर अपने शरारती दिमाग से लाचार था जैसे ही हाथी वहां से पेड़ के नीचे से गुजरने लगा| बन्दर ने उसके ऊपर आम फेंक दिया| पहला ऍम हठी के कान में लगा और दूसरा आप उसकी आंख में लगा| फिर हाथी को गुस्सा आ गया, हाथी ने गुस्से में अपनी सूंड ऊपर उठाई और बंदर को पकड़ लिया और अपनी सूंड में लपेट लिया| गुस्से में हाथी ने बंदर को कहा कि आज मैं तुझे मार डालूंगा| तू सब को परेशान करता है| इस पर बंदर ने अपने कान पकड़ लिए और माफी मांगने लगा और कहने लगा कि अब से मैं किसी को परेशान नहीं करूंगा और बंदर रोने भी लग गया और उसने बोला कि मैं अब किसी को शिकायत का मौका नहीं दूंगा| हाथी को उस पर दया आ गई और उसने बंदर को छोड़ दिया| कुछ समय के बाद दोनों में अच्छी मित्रता हो गई| अब बंदर हर रोज अपने मित्र हाथी को फल तोड़कर देता और वह दोनों जंगल में घूमते रहते| 

नैतिक शिक्षा: 

किसी को परेशान नहीं करना चाहिए उसका परिणाम बुरा ही होता है।

6. सुंदरवन की कहानी ( Best Hindi panchtantra stories for kids)

सुंदरबन नामक एक जंगल था वहां पर बहुत सारे पशु, पक्षी, जानवर रहा करते थे| वह बहुत ही खूबसूरत जंगल हुआ करता था| परंतु धीरे-धीरे उसकी सुंदरता में कमी आने लगी| वहां पर मौजूद तालाबों में पानी खत्म होने लगा और पेड़ों से पत्ते झड़ने लगे थे क्योंकि वहां पर काफी सालों से बरसात नहीं हो रही थी| जिसके कारण वहां के पशु, पक्षियों ने उस जंगल को छोड़ने का निर्णय कर लिया| क्योंकि हरियाली ना होने की वजह से पशु, पक्षियों का मन भी जंगल में नहीं लगता था| 

उन्होंने अब वहां से किसी और मन में जाने का सोचा, तभी गिद्धों ने ऊपर उठकर देखा उन्होंने देखा कि जंगल की और काले घने बादल आ रहे हैं| उन्होंने सभी जानवर और पशु पक्षियों को बोला कि काले बादल हमारी तरफ आ रहे हैं| अब यहां पर बारिश होगी, इस पर सभी पशु, पक्षी वापस सुंदरबन आ गए| देखते ही देखते कुछ देर में बारिश शुरू हो गई| बारिश कितनी ज्यादा हुई कि 2 से 3 दिन तक खत्म ही नहीं हुई| जब बारिश खत्म हुई तो वह पशु बाहर निकले उन्होंने देखा कि तालाबों और झीलों में खूब सारा पानी है सारे पेड़ पौधे पर नए नए पत्ते निकल आए हैं| 

इस पर सभी पशु और पक्षी खुश हो गए और उत्सव मनाने लगे| हिरण दौड़ दौड़ कर खुशियां मना रहे थे, सारे पपीहे और दादुर मिलकर नए-नए आवाज़ों का आविष्कार कर रहे थे| इस प्रकार सभी पशु, पक्षी खुश थे और उन्होंने दूसरे जंगल जाने का इरादा छोड़ दिया था और वह अपने घर में ही खुशी-खुशी रहने लगे थे| 

नैतिक शिक्षा: 

धैर्य का फल मीठा होता है।

7. चिंटू का भोलू

चिंटू छोटा सा बच्चा है| उसके पास एक सफेद रंग का कुत्ता है| जिसका नाम गोलू है| चिंटू और गोलू दोनों अच्छे मित्र थे| गोलू चिंटू के घर में रहता था और चिंटू की ढेर सारी मदद करता था| जब चिंटू ने स्कूल जाना होता था तो गोलू उसके लिए बोतल उठा कर लाता, उसके जूते उठाकर उसे दे देता| गोलू घर में किसी दूसरे को घुसने नहीं देता था| जब भी कोई उनके घर में आता तो वह उस पर भोंकने लगता और सारे घर को बता देता कि कोई आया है| 

चिंटू अपने गोलू को बहुत प्यार से खाना खिलाता था| उसके साथ खेलता था| चिंटू जब पार्क में खेलता था तो गोलू उसकी बोल लाकर चिंटू को देता था| गोलू घर में सभी काम करता था| वह कभी चौकीदार बन जाता तो कभी घर का नौकर बन जाता था| जब चिंटू की मां घर में छत पर पापड़, गेहूं या चावल सूखने के लिए छत्त पर रखतु तो वहां पर निगरानी रखता| किसी भी चिड़िया को वहां पर बैठने नहीं देता था| सामान को बर्बाद होने से बचाता था| 

8. चिड़ियाघर की सैर – Panchtantra Story in Hindi

एक बार की बात है कि रोहन अपने मम्मी पापा के साथ एक चिड़ियाघर में घूमने के लिए गया| छोटा बच्चा था इसलिए चिड़ियाघर के लिए उसकी टिकट नहीं लगती थी| वह अक्सर अपनी मम्मी की गोद में जाया करता था| उसके मम्मी पापा ने तो टिकट ली और वह तीनों चिड़ियाघर के अंदर चले गए| रोहन ने चिड़ियाघर के अंदर एक तालाब देखा|  जिसमें बहुत सारे बत्तख और बगुले तैर रहे थे| उसको बहुत अच्छा लगा| उसने फिर एक बंदर देखा जो अपने साथ छोटे-छोटे बंदरों को खिला रहा था| फिर थोड़ा आगे गए तो उसने एक भालू को देखा और एक जिराफ को देखा और काफी सारे शेरों को देखा जो चिल्ला रहे थे| 

फिर उसने एक हाथी का झुंड वहां पर खड़ा देखा और उसके छोटे-छोटे बच्चे भी वहां पर थे वह आपस में खेल रहे थे| इस तमाशे को देखकर रोहन बहुत खुश हो रहा था| रोहन खड़ा हुआ और हाथी के झुंड को देखने लगा| जब वह वहां से चले तो अपनी मम्मी की गोदी में नहीं चल रहा था| हमने वहां देखा कि उसके जैसे छोटे-छोटे बच्चे अपने पैरों पर चल रहे हैं| इसलिए वह भी अपनी मम्मी की गोद में नहीं जाना चाहता था| वह भी अपने पैरों से चलने लगा क्योंकि बेटा चलना सीख रहा था| यह दखकर रोहन के मम्मी पापा बहुत खुश हो रहे थे| फिर उसके बाद उन्होंने चिड़ियाघर में रेलगाड़ी की सवारी की| 

नैतिक शिक्षा:

बच्चे अनुकरण से सीखते हैं

बच्चों के मन के विकास के लिए उन्हें दुनिया का रूप दिखाना चाहिए।

9. हिरण का बच्चा – Hindi panchatantra stories

एक जंगल में हिरण का परिवार रहता था| उसके छोटे-छोटे बच्चे थे, उसका एक बच्चा बहुत ही ज्यादा सुंदर था| एक दिन की बात है कि वह खरगोश के साथ दौड़ लगाने लगा| वह खरगोश से आगे निकल गया, वह इतना आगे निकल गया कि वह जंगल को पार कर गया, वह नदी को पार कर गया, खेत को पार कर गया लेकिन पहाड़ को पार नहीं कर पाया| वह उस पहाड़ की चट्टान के साथ टकरा गया और वहां गिर गया| फिर वह बंदर का बच्चा रोने लगा| इतने में बंदर वहां आया उसने उसकी टांग हिलाई| परंतु हिरण का बच्चा चुप नहीं हुआ, फिर भालू दादा आए उसने उसे गोद में खिलाया, उससे भी वह चुप नहीं हुआ, सियार ने उसे नाच कर दिखाया उस से भी वह बच्चा चुप नहीं हुआ| फिर इतने में ही हिरण की मां आई, उसने उसे प्यार किया और कहा चलो उस चट्टान को की हम पिटाई करते हैं हिरण का बच्चा फिर से रोने लगा| उसके बाद उसकी मां हंसने लगी, उसका बच्चा भी हंसने लगा, बंदर हंसने लगा, भालू हंसने लगा, सब हंसने लग गए| 

नैतिक शिक्षा:

बाल बालकों में संवेदना बड़ों से अधिक होती है उसे बढ़ावा दें।

10. मित्र की आवश्यकता ( तीन कछुओं की कहानी)

एक तालाब में तीन कछुए रहा करते थे| जिनमें से दो कछुए आपस में खूब लड़ते थे और तीसरा कछुआ समझदार था इसलिए वह कभी भी लड़ाई नहीं करता था| एक दिन की बात है लड़ाई करने वाले बच्चों में से एक पत्थर से गिरकर उल्टा हो गया, कछुए के पैर आसमान में हो गए और उसकी पीठ जमीन पर लगी हुई थी| उस कछुए ने काफी देर तक पर्यतन करा परंतु वह सीधा नहीं हो पा रहा था और उसे बहुत ज्यादा पछतावा हो रहा था कि उसने आज तक लड़ाई के अलावा कुछ भी नहीं किया है| उस समय उसके आसपास भी उसकी मदद करने के लिए कोई भी नहीं था| 

तलाब में दोनों कछुए उस कछुए का इंतजार कर रहे थे| थोड़ा समय इंतजार करने के बाद उन्हें संदेह हुआ कि तीसरे कछुए के साथ कुछ ना कुछ जरूर हुआ है| फिर वह दोनों बच्चे तालाब से बाहर निकले और उसे ढूंढने के लिए निकल गए| थोड़ी देर बाद उन्हें पत्थर के साथ उनका तीसरा कछुआ मित्र पड़ा हुआ दिखाई दिया जो कि उल्टा पड़ा हुआ था| उन दोनों कछुए ने मिलकर तीसरे को सीधा करा और उसका हाल चाल पूछने लगे| वह कछुआ अपने किए पर शर्मिंदा हुआ| जोर जोर से रोने लगा और दोनों मित्रों से कभी लड़ाई ना करने की बात कहकर माफी मांगने लगा| 

वह तीनों कछुए दोस्त बन गए और तालाब में रहने लगे| वह एक दूसरे के साथ कभी लड़ाई नहीं करते थे| उन्हें मालूम हो गया था कि एक दूसरे की सहायता के बिना जीवन मुश्किल है| 

नैतिक शिक्षा:

अपने आसपास के लोगों से कभी लड़ाई नहीं करनी चाहिए| कोई पता नहीं होता कि समय आने पर किस की जरूरत पड़ सकती है।

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