Maha Purush Ki Kahani | महापुरुषों की कहानी

दोस्तों क्या आप भी Maha Purush Ki Kahani – महापुरुषों की कहानी के बारे में सर्च कर रहे है| अगर ऐसा है तो आप बिलकुल सही जगह पर आये हैं क्यूंकि आज की इस पोस्ट में हम आपके साथ महापुरुषों की कहानी के बारे में जानकारी शेयर करने जा रहे है| जिन्हे पढ़कर आपको भी काफी कुछ सीखने को मिलगे| चलिए अब हम कहानियां शुरू करते है|

1. पंडित दीनदयाल उपाध्याय – Maha Purush Ki Kahani

एक बार की बात है कि बेंगलुरु के भीड़ भरे बाजार में एक महिला काफी समय से परेशान घूम रही थी और वह खुद से बुड बुड़ाते हुए बातें भी कर रही थी| वह महिला कभी इधर जा रही थी कभी उधर जा रही थी| वही उसी बाजार में एक आदमी खड़ा था जो कि उस महिला को बड़े समय से देख रहा था| 

वह व्यक्ति उस महिला के पास गया और उसने उस महिला की परेशानी की वजह पूछी| जैसे ही उस व्यक्ति ने उस महिला से बात करी महिला ने उसे वहां से चले जाने के लिए कहा| वह व्यक्ति वहां से नहीं गया और उसने फिर दोबारा से महिला से उसकी परेशानी की वजह पूछी| उस व्यक्ति ने उस माहिला से बात करी और उसे विश्वास दिलाया कि वह उसकी परेशानी का कोई ना कोई हल जरूर निकालने की कोशिश करेगा| 

यह सुनने के बाद महिला ने उस व्यक्ति को बताया कि मेरा पति काफी समय से बहुत बीमार है| उसका इलाज चल रहा है और उसके इलाज के लिए उसके पास जितनी धनराशि थी वह सारी लग गई है| यहां तक कि उसका घर भी गिरवी पड़ा है| घर में मौजूद गहने तक भी उसने बेच दिए है| अब उसके पास पैसे खत्म हो गया है| परंतु उसका पति अभी भी स्वस्थ नहीं हुआ हैं| उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह अपने पति के इलाज के लिए पैसों का इंतजाम कैसे करें|

यह सुनते ही सज्जन पुरुष ने कहा कि आप घबराएं नहीं अब जितना पैसा आपको चाहिए आप मेरे से ले लीजिए| जब आपके पति स्वस्थ हो जाएंगे तब आप मेरे पैसे मुझे वापस लौटा देना| लेकिन फिर भी उस महिला ने पैसे लेने से साफ इंकार कर दिया| फिर उस व्यक्ति ने महिला को समझाया और विनती करते हुए कहा कि आप मुझसे पैसे ले लीजिए| आप पैसे उधार समझकर रख लीजिए और जब आपके पति ठीक हो जाएंगे तब पैसे मुझे वापिस लौटा देना|

यह सुनकर उस औरत ने उस व्यक्ति से पैसे उधार ले लिए और वहां से चली गई| लगभग 2 महीने बीत गए और उसके पति बिल्कुल स्वस्थ हो गए| फिर वह महिला अपने पति को साथ लेकर उस व्यक्ति के घर पर पहुंच गई और उसे सामने देखकर उस महिला और उसके पति ने उस व्यक्ति के पांव छुए| उसके सारे पैसे उसको वापस लौटा दिए| यह देखकर वह व्यक्ति बहुत खुश हुआ कि उस महिला का पति बिल्कुल स्वस्थ हो गया है| उसके दिए हुए पैसे उस महिला के काम आए हैं| उसको लगा कि उसका मनुष्य जीवन सफल हो गया है| 

उस महिला ने उस सज्जन व्यक्ति को जीवन में सफल होने का आशीर्वाद दिया और साथ में यह भी कहा कि अगर आप जैसे सज्जन व्यक्ति इस दुनिया में है तो हर किसी का भला ही होगा| कुछ देर बाद उस औरत और उसके पति को पता चला कि वह सज्जन व्यक्ति कोई और नहीं पंडित दीनदयाल उपाध्याय खुद है।

2. ईश्वर चंद्र विद्यासागर – महापुरुषों की कहानी

एक बार की बात है कि ishwar chandra vidyasagar कोलकाता के बाजार में जा रहे थे| वहां पर उन्होंने एक औरत को देखा जो बुड बढ़ा रही थी, खुद से बातें कर रही थी और काफी ज्यादा परेशान दिख रही थी| फिर ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी उस औरत के पास गए और उससे उसकी परेशानी की वजह पूछी| उस औरत ने अपनी परेशानी बताने से साफ मना कर दिया| फिर ईश्वर चंद जी ने उस औरत को भरोसा दिलाया और कहा कि आप अपनी परेशानी मुझे बताइए क्या पता मैं उसके लिए आपको कोई समाधान दे सकूं| 

ईश्वर चंद्र जी ने उस औरत को आश्वासन दिलाते हुए अपनी परेशानी बताने को कहा| फिर उस फिर उस औरत ने ईश्वर चंद्र जी को अपनी परेशानी बताई| उसने कहा कि उसका पति काफी समय से बीमार था| जिसकी वजह से उसके सारे पैसे खर्च हो गए थे और उसकी बेटी की शादी के लिए भी उसने किसी साहूकार से पैसे उधार लिए थे| परंतु उसके पास पैसे बिल्कुल खत्म हो गए हैं और वह पैसे चुकाने में भी असमर्थ है| जिसकी वजह से साहूकार ने उसके ऊपर कोर्ट केस कर दिया है| अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं, उस साहूकार को पैसे कहां से दूं, कैसे मेरे मुसीबतों का समाधान होगा| मैं इस कोर्ट कचहरी के झमेले से कैसे बाहर निकल सकूंगी|

यह सुनकर ईश्वर चंद्र जी ने उस औरत को कहा कि आप धैर्य रखिए भगवान सबके साथ है| आपके लिए भी भगवान ने कुछ ना कुछ जरूर सोचा होगा और जो मुसीबत आप पर पड़ी हुई है इसका भी कोई ना कोई समाधान जरूर निकल जाएगा| उसके बाद वह औरत वहां से चली गई और 2 दिन बाद उस औरत की कोर्ट में पेशी थी| जिसके लिए वह वहां पर बैठी इंतजार कर रही थी कि कब उसकी नाम की आवाज को पुकारा जाएगा और वह वहां अंदर कोर्ट के अंदर जाएगी|

परंतु उस औरत के पास देने के लिए पैसे नहीं थे जिसकी वजह से वह बहुत ज्यादा परेशान थी| वह औरत कोर्ट में एक दीवार के साथ बैठ कर रो रही थी और अपनी आवाज पुकारने का इंतजार कर रही थी| काफी समय बीत गया परंतु उसके नाम की आवाज को पुकारा नहीं गया| फिर वह सोचने लग गई कि उसकी आवाज को क्यों नहीं पुकारा गया है| इसलिए वह पता करने के लिए वहां पर कोर्ट के अंदर मौजूद व्यक्ति के पास गई| जो लोगों को उनके नाम से पुकार रहा था| उस औरत ने उस व्यक्ति को अपना नाम और केस के बारे में बताया| 

फिर उस व्यक्ति ने कोर्ट के दस्तावेजों में चेक करा और उसे बताया कि उसका नाम पर जो केस था उसे हटा दिया गया है| क्योंकि उसके नाम पर जो धनराशि थी वह दे दी गई है और उसका कोर्ट केस खारिज हो चुका है| यह सुनकर वह औरत बहुत खुश हुई और वहां से चली गई| वह सोचने लगी कि उसके पास तो देने के लिए पैसे नहीं थे तो यह पैसे किसने दिए होंगे| परंतु उस औरत को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था| कुछ दिन बीते और दिन बीतने के बाद उसे पता चला कि जो व्यक्ति उसे उस दिन बाजार में मिला था उसी व्यक्ति ने कोर्ट में यह पैसे दिए हैं| जिसकी वजह से उसका कोर्ट केस खत्म हो गया है।

Conclusion

उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा शेयर करी गई Maha Purush Ki Kahani – महापुरुषों की कहानी पढ़कर आपको अच्छा लगा होगा और आपको भी इन कहानियों से काफी कुछ अच्छा अच्छा सीखने को मिला होगा| अगर आपको हमारे द्वारा शेयर करी गई कहानियां पसंद आई हो या फिर आप हमे कोई राय देना चाहते है तो आप हमे नीचे कमेन्स्ट बोस में कमेंट कर सकते है|

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